इस फ़ुल बॉडी वर्कआउट के लिए किसी उपकरण की ज़रूरत नहीं है। वार्म-अप और कूल-डाउन मिलाकर इसमें लगभग 30 मिनट लगते हैं और यह एक ही सेशन में पैर, ग्लूट्स (कूल्हे), छाती, कंधे, पीठ और कोर को ट्रेन करता है। इसे हफ़्ते में दो या तीन बार, बीच में एक दिन का गैप देकर करें। नीचे से अपने हिसाब का लेवल चुनें, और जब रेप रेंज का ऊपरी सिरा आरामदायक लगने लगे, तो अगले लेवल पर जाएँ।

यह वर्कआउट छह मूवमेंट पैटर्न इस्तेमाल करता है जो मिलकर पूरे शरीर को कवर करते हैं: एक स्क्वाट, एक हिप हिंज, एक लंज, एक पुश, एक पुल और एक कोर एक्सरसाइज़। हर सेशन में सभी पैटर्न कवर होना ही फ़ुल बॉडी ट्रेनिंग को उन लोगों के लिए इतना असरदार बनाता है जो हफ़्ते में कुछ बार घर पर ट्रेनिंग करते हैं।

वर्कआउट का ढाँचा

आप छह एक्सरसाइज़ को सर्किट की तरह करेंगे: क्रम से हर एक्सरसाइज़ का एक सेट, फिर आराम और दोहराना।

  • वार्म-अप: 5 मिनट (एक जगह मार्च, आर्म सर्कल, हिप सर्कल, लेग स्विंग, 10 धीमे स्क्वाट)। हमारा 5 मिनट का वार्म-अप पूरा रूटीन देता है।
  • मुख्य सर्किट: 3 राउंड। एक्सरसाइज़ के बीच 30 से 45 सेकंड और राउंड के बीच 90 से 120 सेकंड आराम।
  • कूल-डाउन: 5 मिनट चलना और स्ट्रेचिंग। देखें वर्कआउट के बाद स्ट्रेचिंग।

बिगिनर्स पहले एक-दो हफ़्ते 2 राउंड कर सकते हैं, फिर तीसरा जोड़ें।

अगर आपको स्ट्रेट सेट पसंद हैं (एक एक्सरसाइज़ के सारे सेट करके अगली पर जाना), तो वो भी चलेगा। सेटों के बीच 60 से 90 सेकंड आराम करें। सर्किट धड़कन ऊँची रखता है और समय बचाता है; स्ट्रेट सेट एक मूवमेंट पर ध्यान देने देते हैं और आमतौर पर कुछ रेप्स ज़्यादा हो जाते हैं।

लेवल 1: बिगिनर

  1. चेयर स्क्वाट: 10 से 12 रेप्स। कुर्सी की ओर पीछे बैठें जब तक हल्का सा छू न जाए, फिर पूरे पैर से ज़ोर लगाकर खड़े हों।
  2. ग्लूट ब्रिज: 12 से 15 रेप्स। पीठ के बल लेटें, पैर ज़मीन पर सपाट, और हिप्स को तब तक ऊपर उठाएँ जब तक कंधे से घुटने तक सीधी लाइन न बन जाए। ऊपर एक सेकंड ग्लूट्स कसें।
  3. सहारे के साथ रिवर्स लंज: हर पैर से 6 से 8 रेप्स। संतुलन के लिए कुर्सी या दीवार पकड़ें और धीरे से पीछे कदम रखें।
  4. इनक्लाइन पुश-अप: 8 से 10 रेप्स। हाथ किचन काउंटर, मज़बूत मेज़ या सोफ़े की पीठ पर रखें। सतह जितनी ऊँची, उतना आसान।
  5. पेट के बल Y-रेज़: 10 रेप्स। पेट के बल लेटें, बाहें सिर के ऊपर Y आकार में, अंगूठे ऊपर। कंधे की हड्डियों (शोल्डर ब्लेड) को नीचे-पीछे खींचते हुए बाहों को ज़मीन से कुछ सेंटीमीटर उठाएँ, रुकें, नीचे लाएँ।
  6. डेड बग: हर तरफ़ 6 से 8। पीठ के बल, बाहें ऊपर और घुटने 90 डिग्री पर मुड़े। उल्टी तरफ़ का हाथ और पैर धीरे-धीरे फैलाएँ, कमर का निचला हिस्सा ज़मीन से हल्का सटा रहे।

लेवल 2: इंटरमीडिएट

  1. बॉडीवेट स्क्वाट: 15 से 20 रेप्स। अगर मोबिलिटी इजाज़त दे तो जाँघें कम से कम ज़मीन के समानांतर।
  2. सिंगल-लेग ग्लूट ब्रिज: हर पैर से 8 से 12।
  3. रिवर्स लंज: हर पैर से 10 से 12, बिना सहारे।
  4. पुश-अप: 8 से 15 रेप्स। पूरे पुश-अप अभी न हों तो घुटनों वाले ठीक हैं; सिर से घुटनों तक सीधी लाइन रखें।
  5. मेज़ के नीचे रो (टेबल रो): 8 से 12 रेप्स। एक मज़बूत मेज़ के नीचे लेटें, किनारा पकड़ें और शरीर सीधा रखते हुए छाती को मेज़ की ओर खींचें। अगर ऐसी मेज़ नहीं है जो सुरक्षित रूप से आपका वज़न उठा सके, तो उसकी जगह पेट के बल 12 से 15 "स्नो एंजेल" करें।
  6. प्लैंक: 30 से 45 सेकंड। कोहनियाँ कंधों के नीचे, ग्लूट्स कसे हुए, पसलियाँ नीचे खिंची हुई।

लेवल 3: एडवांस्ड

  1. बल्गेरियन स्प्लिट स्क्वाट: हर पैर से 10 से 12, पीछे वाला पैर कुर्सी या सोफ़े पर।
  2. सिंगल-लेग हिप थ्रस्ट: हर पैर से 12 से 15, कंधे सोफ़े के किनारे पर।
  3. जंप लंज या धीमे वॉकिंग लंज: हर पैर से 8 से 10। ज़्यादा कंडीशनिंग चाहिए और घुटने सह लें तो जंप चुनें; अपार्टमेंट में रहते हैं तो धीमे लंज।
  4. डिक्लाइन या टेम्पो पुश-अप: 10 से 15 रेप्स। पैर कुर्सी पर, या पूरे पुश-अप जिनमें नीचे जाने में 3 सेकंड लगें।
  5. पॉज़ के साथ टेबल रो: 10 से 12 रेप्स, ऊपर 2 सेकंड रुकें।
  6. रीच-थ्रू के साथ साइड प्लैंक: हर तरफ़ 8, या 30 से 45 सेकंड का साइड प्लैंक होल्ड।

कौन सा लेवल चुनें, पता नहीं? लेवल 1 आज़माएँ। अगर 3 राउंड पूरे करके लगे कि हर एक्सरसाइज़ में आसानी से और कर सकते थे, तो अगली बार लेवल 2 करें। लेवल मिलाना भी ठीक है, जैसे लेवल 2 के पैर और लेवल 1 के पुश-अप।

हफ़्ते का सैंपल प्लान

फ़ुल बॉडी सेशन के बाद उन्हीं मांसपेशियों को लगभग 48 घंटे की रिकवरी चाहिए, इसलिए इन्हें फैलाकर रखें:

  • सोमवार: फ़ुल बॉडी वर्कआउट
  • मंगलवार: 30 मिनट तेज़ चाल से टहलना
  • बुधवार: फ़ुल बॉडी वर्कआउट
  • गुरुवार: आराम या हल्की स्ट्रेचिंग
  • शुक्रवार: फ़ुल बॉडी वर्कआउट
  • शनिवार: लंबी सैर, साइकिलिंग या कोई भी पसंदीदा गतिविधि
  • रविवार: आराम

इससे WHO की यह सलाह पूरी होती है कि हफ़्ते में कम से कम दो दिन मांसपेशियाँ मज़बूत करने वाली एक्सरसाइज़ हो, और टहलने के साथ आप हफ़्ते के 150 से 300 मिनट की मध्यम गतिविधि के काफ़ी करीब पहुँच जाते हैं। तीन सेशन फ़िट न हों, तो दो भी फ़ायदेमंद हैं।

प्रगति कैसे करें

फ़ुल बॉडी ट्रेनिंग तभी असर करती रहती है जब वह कठिन होती जाए। हर बार जब आप सभी राउंड अच्छी फ़ॉर्म के साथ रेप रेंज के ऊपरी सिरे पर पूरे कर लें, तो इनमें से एक बदलाव करें:

  • रेप्स बढ़ाएँ, रेंज के ऊपरी सिरे तक।
  • चौथा राउंड जोड़ें।
  • नीचे जाने का हिस्सा 3 से 4 सेकंड में करें।
  • सबसे कठिन जगह पर 1 से 2 सेकंड रुकें (स्क्वाट में सबसे नीचे, छाती ज़मीन से ज़रा ऊपर)।
  • उस एक्सरसाइज़ को अगले लेवल के वेरिएशन पर ले जाएँ।

बॉडीवेट ट्रेनिंग से बिल्कुल मसल्स बन सकती हैं, बशर्ते सेट चुनौतीपूर्ण हों, यानी फ़ेलियर से कुछ ही रेप्स पहले ख़त्म हों। इस पर विस्तार से क्या बॉडीवेट एक्सरसाइज़ से मसल्स बन सकती हैं में बात की है। बदलने के लिए और मूवमेंट चाहिए तो हमारी सबसे अच्छी बॉडीवेट एक्सरसाइज़ की सूची देखें।

फ़ॉर्म की सबसे ज़रूरी बातें

  • स्क्वाट और लंज: घुटने पैर की उँगलियों की सीध में, पूरा पैर ज़मीन पर, छाती ऊपर।
  • ब्रिज और हिप थ्रस्ट: एड़ियों से ज़ोर लगाएँ और मूवमेंट ग्लूट्स से पूरा करें, कमर को धनुष की तरह मोड़कर नहीं।
  • पुश-अप: हाथ कंधों से थोड़े चौड़े, कोहनियाँ शरीर से लगभग 45 डिग्री पर, सीधे बाहर फैली हुई नहीं।
  • रो: कोहनियों से खींचें और ऊपर कंधे की हड्डियों को आपस में दबाएँ।
  • कोर एक्सरसाइज़: साँस लेते रहें। प्लैंक में साँस रोकना ब्रेसिंग नहीं है, बस साँस रोकना है।

किसे सावधान रहना चाहिए

अगर घुटने, कूल्हे, कंधे या पीठ में दर्द है, तो सबसे आसान ऐसा वेरिएशन चुनें जिसमें दर्द न हो, और दर्द बना रहे तो डॉक्टर या फ़िज़ियोथेरेपिस्ट से बात करें। दिल की समस्या, हाई ब्लड प्रेशर, गर्भावस्था या चोट या सर्जरी के बाद वापसी पर भी यही बात लागू है। पेल्विक फ़्लोर की समस्या या जोड़ों की तकलीफ़ हो तो जंप वाले वेरिएशन न करें; धीमे वर्ज़न वही मांसपेशियाँ ट्रेन करते हैं।

अगर आप ऐसा वर्ज़न चाहते हैं जो हर दिन आपके लक्ष्य और फ़ोकस एरिया के हिसाब से बदले, तो FIThim 152 एक्सरसाइज़ की लाइब्रेरी से फ़ुल बॉडी सेशन बनाता है, हर एक्सरसाइज़ फ़ोटो और छोटे डेमो के साथ।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या रोज़ फ़ुल बॉडी वर्कआउट करना ज़्यादा है?

यह वर्कआउट रोज़ पूरी ताकत से करने पर उन्हीं मांसपेशियों को रिकवरी का पूरा समय नहीं मिलता। हफ़्ते में दो-तीन बार सबसे सही है। बाकी दिनों में टहलें या हल्की मोबिलिटी करें।

फ़ुल बॉडी वर्कआउट कितना लंबा होना चाहिए?

ज़्यादातर लोगों के लिए 20 से 45 मिनट काफ़ी हैं। यह वर्कआउट वार्म-अप और कूल-डाउन के साथ लगभग 30 मिनट का है। समय कम है? 3 की जगह 2 राउंड करें।

क्या बिना उपकरण वाला वर्कआउट जिम की जगह ले सकता है?

सामान्य फ़िटनेस, सेहत और अच्छी-ख़ासी ताकत और मसल्स के लिए, हाँ। अधिकतम ताकत के पीछे भागने वाले बहुत एडवांस्ड लोगों को आख़िरकार बाहरी वज़न चाहिए होता है, लेकिन ज़्यादातर लोगों के पास बॉडीवेट वेरिएशन से सालों की प्रगति बाकी है।

क्या फ़ुल बॉडी वर्कआउट से वज़न घटेगा?

यह एनर्जी ख़र्च करके और मसल्स बचाकर मदद करता है, लेकिन वज़न घटना मुख्य रूप से लगातार कैलोरी डेफ़िसिट पर निर्भर करता है। बेहतरीन नतीजों के लिए इस वर्कआउट को समझदारी भरे खाने और रोज़ टहलने के साथ मिलाएँ।