घर पर अच्छे एब्स वर्कआउट के लिए बस एक मैट और लगभग 15 मिनट चाहिए: ऐसी एक्सरसाइज़ चुनें जो आपके कोर को अलग-अलग तरीकों से काम कराएँ (टाइट करके स्थिर रखना, आगे मोड़ना, घुमाना और घूमने से रोकना), 2-3 राउंड करें और हफ़्ते में 2-3 बार दोहराएँ। नीचे बिना उपकरण की 8 एक्सरसाइज़ हैं, हर एक को करने का सही तरीका है, और शुरुआती व पहले से ट्रेनिंग करने वालों के लिए तैयार रूटीन है।
शुरू करने से पहले एक ईमानदार बात। एब्स एक्सरसाइज़ आपके कोर को मज़बूत और स्थिर बनाती हैं, लेकिन पेट के ऊपर जमी चर्बी को सीधे नहीं जलातीं। अगर लक्ष्य पेट को सपाट करना है, तो वह कुल मिलाकर कैलोरी डेफ़िसिट और पूरे शरीर की ट्रेनिंग से आता है; ऐसा क्यों है, यह हमने क्या एब्स एक्सरसाइज़ से पेट की चर्बी कम होती है? में समझाया है। फिर भी मज़बूत एब्स बनाना फ़ायदेमंद है: ये पोस्चर ठीक रखने में मदद करते हैं, स्क्वाट और पुश-अप में कमर के निचले हिस्से को सहारा देते हैं और लगभग हर दूसरी एक्सरसाइज़ को ज़्यादा स्थिर बनाते हैं।
असल में आपके "एब्स" क्या हैं
कोर सिर्फ़ सिक्स-पैक वाली मांसपेशी नहीं है। एब्स वर्कआउट प्लान करते समय यह जानना काम आता है कि आप किसे ट्रेन कर रहे हैं:
- रेक्टस एब्डोमिनिस: सामने की लंबी मांसपेशी। यह धड़ को आगे की ओर मोड़ती है (क्रंच, लेग रेज़)।
- ऑब्लिक्स: पेट के दोनों तरफ़। ये धड़ को घुमाती और बगल में झुकाती हैं, और ज़रूरत न हो तो उसे मुड़ने से रोकती हैं।
- ट्रांसवर्स एब्डोमिनिस: अंदर की गहरी परत, जो बेल्ट की तरह शरीर को घेरती है। प्लैंक में पेट टाइट करते समय यही काम करती है।
- हिप फ़्लेक्सर और कमर की मांसपेशियाँ: ज़्यादातर कोर एक्सरसाइज़ में ये एब्स के साथ काम करती हैं।
एक संतुलित रूटीन इन सबको ट्रेन करता है। रोज़ 100 क्रंच करने से सिर्फ़ एक हिस्सा ट्रेन होता है, और अक्सर गर्दन पर दबाव भी पड़ता है।
8 एक्सरसाइज़
इन्हें मैट या दरी पर करें। धीरे चलें; कोर ट्रेनिंग में रफ़्तार से कहीं ज़्यादा कंट्रोल मायने रखता है।
1. डेड बग (Dead bug)
पीठ के बल लेटें, बाँहें छत की ओर, घुटने कूल्हों के ऊपर 90 डिग्री पर मुड़े हुए। कमर के निचले हिस्से को हल्के से ज़मीन पर दबाएँ। धीरे-धीरे दायाँ हाथ सिर के पीछे ले जाएँ और बायाँ पैर ज़मीन की ओर सीधा करें, कमर उठने से पहले रुक जाएँ। वापस आएँ और साइड बदलें। टिप: हाथ-पैर फैलाते समय साँस छोड़ें। करें: हर साइड 8-10।
2. फ़ोरआर्म प्लैंक (Plank)
कोहनियाँ कंधों के नीचे और बाँहें ज़मीन पर, शरीर सिर से एड़ी तक एक सीधी लाइन में। ग्लूट्स (कूल्हे की मांसपेशियाँ) कसें और नाभि को हल्के से रीढ़ की ओर खींचें। करें: 20-45 सेकंड। अगर कूल्हे नीचे लटकें या कमर में दर्द हो, सेट रोक दें। फ़ॉर्म और कितनी देर होल्ड करें, यह सब प्लैंक गाइड में है।
3. क्रंच (Crunch)
पीठ के बल लेटें, घुटने मुड़े, पैर ज़मीन पर। उँगलियों के सिरे हल्के से कानों के पीछे या बाँहें छाती पर क्रॉस। पसलियों और कूल्हों के बीच की दूरी कम करते हुए कंधों की हड्डियाँ ज़मीन से उठाएँ, एक पल रुकें और धीरे से नीचे आएँ। टिप: ठुड्डी और छाती के बीच मुट्ठी भर जगह रखें; सिर को हाथों से न खींचें। करें: 12-15 रेप्स।
4. रिवर्स क्रंच (Reverse crunch)
पीठ के बल, घुटने कूल्हों के ऊपर 90 डिग्री पर, बाँहें शरीर के बगल में। निचले पेट की ताकत से कूल्हों को ज़मीन से कुछ सेंटीमीटर उठाएँ और घुटने छाती की ओर लाएँ, फिर कंट्रोल के साथ नीचे लाएँ। टिप: मूवमेंट छोटा है; पैरों को झुलाएँ नहीं। करें: 10-15 रेप्स।
5. साइड प्लैंक (Side plank)
करवट लेकर लेटें, कोहनी कंधे के नीचे, पैर एक के ऊपर एक। कूल्हे उठाएँ ताकि शरीर सीधी लाइन में आ जाए। शुरुआती लोग घुटने मोड़कर ज़मीन पर रख सकते हैं। करें: हर साइड 15-30 सेकंड।
6. बाइसिकल क्रंच (Bicycle crunch)
पीठ के बल, हाथ हल्के से सिर के पीछे, पैर हवा में। दायाँ पैर सीधा करते हुए दाईं कोहनी को बाएँ घुटने की ओर लाएँ, फिर साइड बदलें। टिप: पसलियों से घूमें, कोहनी को झटके से न खींचें; धीरे करना बेहतर है। करें: हर साइड 10-12।
7. माउंटेन क्लाइंबर (Mountain climbers)
हाई प्लैंक (पुश-अप की ऊपरी पोज़िशन) से एक घुटना छाती की ओर लाएँ, फिर लय में पैर बदलते रहें। कूल्हे कंधों की ऊँचाई पर रखें। इसमें थोड़ा कार्डियो भी जुड़ जाता है। करें: 20-30 सेकंड। तकनीक के बारे में और जानकारी हमारी माउंटेन क्लाइंबर गाइड में।
8. बर्ड डॉग (Bird dog)
हाथों और घुटनों के बल आएँ, हाथ कंधों के नीचे, घुटने कूल्हों के नीचे। दायाँ हाथ आगे और बायाँ पैर पीछे फैलाएँ जब तक दोनों शरीर की सीध में न आ जाएँ, दो सेकंड रुकें, वापस आएँ और बदलें। टिप: सोचें कि आपकी कमर पर पानी का गिलास रखा है जो गिरना नहीं चाहिए। करें: हर साइड 8-10।
रूटीन
शुरुआती वर्ज़न (लगभग 12 मिनट)
हर एक्सरसाइज़ एक बार करें, एक्सरसाइज़ के बीच 20-30 सेकंड आराम, फिर 60-90 सेकंड आराम और दोहराएँ, कुल 2 राउंड।
- डेड बग: हर साइड 8
- फ़ोरआर्म प्लैंक: 20 सेकंड (ज़रूरत हो तो घुटनों पर)
- क्रंच: 10 रेप्स
- रिवर्स क्रंच: 8 रेप्स
- घुटनों पर साइड प्लैंक: हर साइड 15 सेकंड
- बर्ड डॉग: हर साइड 8
स्टैंडर्ड वर्ज़न (लगभग 15-18 मिनट)
ऊपर दिए क्रम में सभी 8 एक्सरसाइज़, एक्सरसाइज़ के बीच 15-20 सेकंड और राउंड के बीच 60 सेकंड आराम, 3 राउंड। हर रेप या समय की रेंज का ऊपरी हिस्सा चुनें।
कितनी बार
हफ़्ते में दो या तीन सेशन, लगातार दिनों पर नहीं, काफ़ी हैं। स्क्वाट, लंज और पुश-अप में भी आपका कोर खूब काम करता है, इसलिए रोज़ अलग एब्स डे की ज़रूरत नहीं। एक समझदार हफ़्ता कुछ ऐसा दिख सकता है:
- सोमवार: फ़ुल-बॉडी वर्कआउट, फिर एब्स रूटीन
- बुधवार: फ़ुल-बॉडी वर्कआउट
- शुक्रवार: फ़ुल-बॉडी वर्कआउट, फिर एब्स रूटीन
- बाकी दिन: टहलना या आराम
अगर बाकी हफ़्ता कैसे बाँटें यह तय नहीं है, तो पढ़ें हफ़्ते में कितने दिन वर्कआउट करना चाहिए।
आगे कैसे बढ़ें
जब स्टैंडर्ड वर्ज़न लगातार दो सेशन आसान लगे, तो एक समय पर एक ही चीज़ बदलें:
- ज़्यादा देर होल्ड: प्लैंक और साइड प्लैंक में 5-10 सेकंड जोड़ें।
- धीमे रेप्स: हर क्रंच या रिवर्स क्रंच में नीचे आने में 3 सेकंड लगाएँ।
- कठिन वैरिएशन: सीधे पैर वाला डेड बग, ऊपरी पैर उठाकर साइड प्लैंक, शोल्डर टैप वाला प्लैंक, लेटकर सीधे पैर उठाना (सिर्फ़ तब जब कमर ज़मीन पर टिकी रहे)।
- कम आराम: एक्सरसाइज़ के बीच आराम 10 सेकंड कर दें।
अगर कुछ ज़्यादा कठिन लगे, एक कदम पीछे जाएँ: घुटने मोड़ें, रेंज छोटी करें या होल्ड का समय घटाएँ। गलत फ़ॉर्म में ज़ोर लगाने का कोई इनाम नहीं है।
आम गलतियाँ
- गर्दन खींचना। क्रंच और बाइसिकल में हाथ सिर्फ़ सिर को सहारा देते हैं। गर्दन में दर्द हो तो बाँहें छाती पर क्रॉस करें।
- कमर का निचला हिस्सा उठ जाना। डेड बग, लेग रेज़ और प्लैंक में अगर कमर ज़मीन से उठ जाए या लटक जाए, तो एक्सरसाइज़ अभी आपके लिए ज़्यादा कठिन है। लीवर छोटा करें।
- साँस रोकना। ज़ोर लगाते समय साँस छोड़ें, होल्ड करते समय सामान्य रूप से साँस लेते रहें।
- जल्दबाज़ी। तेज़ और लापरवाह रेप्स में मोमेंटम काम करता है। धीमे होंगे तो पेट में ज़्यादा महसूस होगा।
- सिर्फ़ क्रंच करना। ब्रेसिंग (प्लैंक, डेड बग) और एंटी-रोटेशन (बर्ड डॉग, साइड प्लैंक) भी शामिल करें।
किन्हें सावधान रहना चाहिए
अगर कमर के निचले हिस्से में दर्द रहता है, तो डेड बग, बर्ड डॉग और छोटे प्लैंक से शुरू करें, और जब तक पता न चले कि आपकी कमर कैसे प्रतिक्रिया देती है, क्रंच और लेग रेज़ न करें; हमारी कमर के निचले हिस्से की एक्सरसाइज़ एक हल्की शुरुआत है। डिलीवरी के बाद, या अगर क्रंच करते समय पेट के बीच में उभार दिखे, तो पारंपरिक एब्स एक्सरसाइज़ से पहले डॉक्टर या महिलाओं के स्वास्थ्य में विशेषज्ञ फ़िज़ियोथेरेपिस्ट से बात करें। तेज़ दर्द देने वाली कोई भी एक्सरसाइज़ रोक दें, और दर्द बना रहे तो डॉक्टर को दिखाएँ।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या मैं रोज़ एब्स ट्रेन कर सकता हूँ?
हल्का कोर वर्क रोज़ किया जा सकता है, लेकिन ज़रूरी नहीं है और इससे नतीजे जल्दी नहीं आते। हफ़्ते में दो-तीन फ़ोकस्ड सेशन और फ़ुल-बॉडी एक्सरसाइज़ से मिलने वाला कोर वर्क ज़्यादातर लोगों के लिए काफ़ी है। हर मांसपेशी की तरह एब्स भी रिकवरी के दौरान मज़बूत होते हैं।
एब्स दिखने में कितना समय लगेगा?
यह मुख्य रूप से बॉडी फ़ैट पर निर्भर करता है, एब्स वर्कआउट पर नहीं। मांसपेशियाँ कुछ हफ़्तों में मज़बूत हो जाती हैं, लेकिन दिखती तभी हैं जब शरीर की कुल चर्बी काफ़ी कम हो। डाइट और एक्सरसाइज़ से लगातार और समझदारी से चर्बी घटाना ही उन्हें सामने लाता है।
प्लैंक बेहतर है या क्रंच?
कोई भी "बेहतर" नहीं; दोनों अलग काम ट्रेन करते हैं। प्लैंक कोर को रीढ़ स्थिर रखना सिखाता है, क्रंच धड़ को मोड़ना। अच्छे रूटीन में दोनों होते हैं, साथ में रोटेशन और एंटी-रोटेशन भी।
क्या अच्छे एब्स वर्कआउट के लिए उपकरण चाहिए?
नहीं। ऊपर की हर एक्सरसाइज़ सिर्फ़ शरीर के वज़न से होती है। अगर आप ख़ुद प्लान नहीं करना चाहते, तो FIThim आपके चुने फ़ोकस एरिया के हिसाब से कोर एक्सरसाइज़ वाला वर्कआउट बना सकता है, हर मूव की फ़ोटो और छोटे डेमो के साथ।