घर पर कमर के निचले हिस्से (लोअर बैक) के लिए सबसे काम की एक्सरसाइज़ हल्की और नियंत्रित मूवमेंट्स हैं, जो रीढ़, कूल्हों और पेट के आसपास की मांसपेशियों को सक्रिय करती हैं: पेल्विक टिल्ट, कैट-काउ, बर्ड डॉग, ग्लूट ब्रिज, डेड बग और मॉडिफ़ाइड साइड प्लैंक। नियमित रूप से करने पर नीचे दिया गया छोटा रूटीन आपकी कमर को ज़्यादा मज़बूत और कम जकड़ी हुई महसूस कराने में मदद कर सकता है, खासकर अगर आप ज़्यादा देर बैठते हैं।

ये एक्सरसाइज़ किसी खास चोट का इलाज नहीं हैं। अगर कमर का दर्द तेज़ है, बढ़ता जा रहा है, या नीचे बताए गए चेतावनी संकेतों के साथ है, तो शुरू करने से पहले डॉक्टर या फ़िज़ियोथेरेपिस्ट से मिलें।

पहले कुछ बुनियादी बातें

हिलना-डुलना आम तौर पर मदद करता है। आम, बिना किसी खास कारण वाले कमर दर्द में ब्रिटेन की NHS जैसी स्वास्थ्य सेवाएँ बिस्तर पर आराम करने के बजाय जितना हो सके एक्टिव रहने की सलाह देती हैं। हल्की एक्सरसाइज़ इसी का हिस्सा है।

हल्की असहजता ठीक है, तेज़ दर्द नहीं। खिंचाव, थोड़ी जकड़न या मांसपेशियों में मेहनत महसूस होना सामान्य है। तेज़, चुभने वाला, जलन वाला या करंट जैसा दर्द, या पैर में नीचे तक जाने वाला दर्द, उस एक्सरसाइज़ को रोकने का संकेत है।

धीमा, ज़ोरदार से बेहतर। लोअर बैक के लिए कंट्रोल और नियमितता इंटेंसिटी से कहीं ज़्यादा मायने रखते हैं। इस रूटीन की हर रेप धीमी हो, साँस आराम से चले, और इतना ज़ोर न लगाएँ कि साँस रुक जाए।

थोड़ा पर अक्सर। ज़्यादातर दिनों में दस से पंद्रह मिनट, हफ़्ते में एक लंबे सेशन से आम तौर पर ज़्यादा फ़ायदा देते हैं।

15 मिनट का रूटीन

एक्सरसाइज़ इसी क्रम में करें। मैट या कालीन इस्तेमाल करें। बीच में जितना ज़रूरी हो, आराम करें।

1. पेल्विक टिल्ट (1 मिनट)

पीठ के बल लेटें, घुटने मुड़े और पैर ज़मीन पर। पेल्विस (कूल्हे की हड्डी) को झुकाते हुए कमर के निचले हिस्से को धीरे से ज़मीन से सटाएँ, जैसे बेल्ट के बकल को ठोड़ी की ओर खींच रहे हों, फिर वापस हल्के प्राकृतिक घुमाव में आ जाएँ। छोटी सी हरकत, कुछ भी उठाना नहीं।

  • 10 से 15 धीमी रेप्स।
  • ध्यान दें: हरकत पेल्विस से आए, पैरों से धकेलकर नहीं।

2. घुटना छाती की ओर (1 से 2 मिनट)

पीठ के बल ही, एक घुटना छाती की ओर लाएँ और दोनों हाथों से जांघ के पीछे या पिंडली पर हल्के से पकड़ें। दूसरा पैर ज़मीन पर रहे। तरफ़ बदलें। अगर आराम लगे, तो दोनों घुटने एक साथ भी ला सकते हैं।

  • हर तरफ़ 20 से 30 सेकंड, दो बार।
  • ध्यान दें: कंधे ढीले रखें, धीरे साँस छोड़ें, ज़ोर से न खींचें।

3. कैट-काउ (1 मिनट)

हाथों और घुटनों पर आएँ, हाथ कंधों के नीचे और घुटने कूल्हों के नीचे। साँस छोड़ते हुए पीठ को धीरे से छत की ओर गोल करें और सिर नीचे जाने दें। साँस लेते हुए पेट को धीरे से नीचे जाने दें और छाती व नज़र ऊपर उठाएँ। सिर्फ़ आरामदायक रेंज में ही हिलें।

  • 8 से 10 धीमे राउंड।
  • ध्यान दें: रीढ़ को एक-एक हिस्से में लहर की तरह हिलाएँ।

4. बर्ड डॉग (3 मिनट)

हाथों और घुटनों पर, पेट हल्का कसें। दाईं बाँह आगे और बायाँ पैर पीछे तब तक बढ़ाएँ जब तक दोनों लगभग शरीर की सीध में न हों, दो-तीन सेकंड रोकें और वापस आएँ। तरफ़ बदलें। कूल्हे और कंधे बराबर रहें, जैसे कमर पर पानी का गिलास रखा हो।

  • हर तरफ़ 6 से 8 रेप्स के 2 से 3 सेट।
  • आसान: सिर्फ़ पैर, या सिर्फ़ बाँह हिलाएँ।
  • ध्यान दें: ऊँचा उठाने के बजाय लंबा फैलाएँ; पैर बहुत ऊँचा उठाने से कमर धनुषाकार हो जाती है।

5. ग्लूट ब्रिज (3 मिनट)

पीठ के बल, घुटने मुड़े, पैर कूल्हों की चौड़ाई पर। साँस छोड़ें, एड़ियों से दबाएँ और कूल्हे उठाएँ जब तक कंधों से घुटनों तक सीधी लाइन न बने। दो सेकंड रोकें, धीरे नीचे आएँ। मज़बूत ग्लूट्स लोअर बैक का काफ़ी काम हल्का कर देते हैं; बारीकियाँ ग्लूट ब्रिज गाइड में हैं।

  • 10 से 12 रेप्स के 2 से 3 सेट।
  • ध्यान दें: ग्लूट्स कसकर उठें, ऊपर पहुँचकर कमर को धनुषाकार न करें।

6. डेड बग (2 से 3 मिनट)

पीठ के बल, बाँहें छत की ओर, घुटने कूल्हों के ऊपर 90 डिग्री पर मुड़े। कमर के निचले हिस्से को हल्का ज़मीन से सटाए रखें और धीरे से एक एड़ी ज़मीन तक ले जाकर छुएँ, फिर वापस। पैर बदलें। जब यह आसान लगे, तो साथ में उल्टी बाँह को सिर के ऊपर की ओर ले जाएँ।

  • हर तरफ़ 6 से 8 रेप्स के 2 सेट।
  • ध्यान दें: अगर कमर ज़मीन से उठे, तो हरकत छोटी करें।

7. मॉडिफ़ाइड साइड प्लैंक (2 मिनट)

करवट लेकर लेटें, घुटने मुड़े, कोहनी कंधे के नीचे। कूल्हे उठाएँ ताकि सिर से घुटनों तक शरीर सीधी लाइन में हो। सामान्य साँस लेते हुए रोकें। यह धड़ के साइड की मांसपेशियों को ट्रेन करता है, जो रीढ़ को स्थिर रखने में मदद करती हैं।

  • हर तरफ़ 15 से 20 सेकंड के 2 होल्ड।
  • बाद में कठिन: सीधे पैर, एक पैर दूसरे के ऊपर। तैयार होने पर सामने वाले प्लैंक के लिए प्लैंक गाइड देखें।

8. चाइल्ड पोज़ / बालासन (1 मिनट)

घुटनों के बल बैठें, कूल्हों को एड़ियों की ओर ले जाएँ और हाथों को ज़मीन पर आगे बढ़ाएँ, छाती को जांघों की ओर झुकने दें। अगर ज़्यादा आराम लगे तो घुटने फैला सकते हैं।

  • 30 से 60 सेकंड रोकें, धीमी साँस के साथ।

हफ़्तों के साथ कैसे आगे बढ़ें

हफ़्ता 1 से 2: रूटीन वैसा ही करें जैसा लिखा है, हफ़्ते में 4 से 5 दिन। धीमी और सहज रेप्स पर ध्यान दें।

हफ़्ता 3 से 4: होल्ड जोड़ें। हर बर्ड डॉग में और हर ब्रिज के ऊपर तीन सेकंड रुकें। अगर दो सेट आसान लगें, तो तीसरा जोड़ें।

हफ़्ता 5 और आगे: एक-एक करके कठिन वर्ज़न पर जाएँ: एक पैर वाला ग्लूट ब्रिज, पूरा साइड प्लैंक, फ़्रंट प्लैंक, और बर्ड डॉग जिसमें घुटना और कोहनी धीरे से शरीर के नीचे मिलें। इस समय हफ़्ते में दो-तीन बार सामान्य स्ट्रेंथ ट्रेनिंग, जैसे कुर्सी तक स्क्वाट और हिप हिंज, अच्छा अगला कदम है। लो-इम्पैक्ट होम वर्कआउट शुरुआत का एक हल्का तरीका है।

लगभग हर दिन पैदल चलना जोड़ना फ़ायदेमंद है। यह लो-इम्पैक्ट है, कमर को हिलाता रहता है और WHO की वयस्कों के लिए हफ़्ते में 150 से 300 मिनट मध्यम एक्टिविटी की सलाह में गिना जाता है।

कमर के लिए मददगार आदतें

  • लंबे समय तक बैठना तोड़ें। लगभग हर आधे घंटे में उठें और एक-दो मिनट चलें-फिरें।
  • कठिन वर्कआउट से पहले वार्म-अप करें। कुछ मिनट की हल्की मूवमेंट, जैसे 5 मिनट का वार्म-अप, कूल्हों और रीढ़ को तैयार करती है।
  • उठाते समय कूल्हों से झुकें। घुटने और कूल्हे मोड़ें, चीज़ को शरीर के पास रखें और भारी चीज़ उठाते समय शरीर को मरोड़ें नहीं।
  • ट्रेनिंग के बाद शरीर को शांत करें। कूल्हों और हैमस्ट्रिंग के लिए हल्की कूल-डाउन स्ट्रेचिंग जकड़न कम कर सकती है।

अगर आप FIThim इस्तेमाल करते हैं, तो शुरुआत में चुने गए फ़ोकस एरिया तय करते हैं कि ऐप रोज़ कौन सा वर्कआउट बनाएगा, और आप हर एक्सरसाइज़ को आज़माने से पहले उसकी फ़ोटो और एनिमेटेड डेमो देख सकते हैं।

पहले डॉक्टर को कब दिखाएँ

ये एक्सरसाइज़ शुरू करने से पहले डॉक्टर या फ़िज़ियोथेरेपिस्ट से बात करें, अगर आपका कमर दर्द:

  • किसी गिरने, दुर्घटना या दूसरी चोट के बाद शुरू हुआ है
  • तेज़ है, लगातार बढ़ रहा है, या कुछ हफ़्तों में ठीक नहीं हुआ
  • एक या दोनों पैरों में फैलता है, या पैरों में सुन्नपन, झनझनाहट या कमज़ोरी के साथ है
  • बुखार, बिना वजह वज़न घटने या आम तौर पर बीमार महसूस करने के साथ है
  • रात में या लेटकर आराम करते समय ज़्यादा होता है
  • गर्भावस्था के दौरान है, या आपको कैंसर, ऑस्टियोपोरोसिस या रीढ़ की सर्जरी का इतिहास है

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

कमर के निचले हिस्से के दर्द के लिए सबसे अच्छी एक्सरसाइज़ कौन सी है?

कोई एक सबसे अच्छी नहीं है। आम लोअर बैक दर्द में किसी खास मूवमेंट से ज़्यादा ज़रूरी है कि आप कुल मिलाकर एक्टिव रहें। ग्लूट्स और धड़ की मांसपेशियों को मज़बूत करने वाली हल्की एक्सरसाइज़, जैसे ब्रिज और बर्ड डॉग, शुरुआत के लिए अच्छी हैं।

क्या कमर दर्द में एक्सरसाइज़ करनी चाहिए?

बिना चेतावनी संकेतों वाले हल्के, आम कमर दर्द में आम तौर पर आराम से ज़्यादा हल्की मूवमेंट की सलाह दी जाती है। वही मूवमेंट करें जिनसे दर्द तेज़ न हो, और अगर सुधार न हो या आप पक्के न हों, तो सलाह लें।

लोअर बैक एक्सरसाइज़ कितनी बार करनी चाहिए?

इस तरह के हल्के रूटीन के लिए ज़्यादातर दिनों में 10 से 15 मिनट अच्छा लक्ष्य है। एक बार में बहुत करने से ज़्यादा ज़रूरी है कई हफ़्तों तक नियमित रहना।

क्या सिट-अप कमर के लिए अच्छे हैं?

अगर कमर संवेदनशील है, तो सिट-अप सबसे अच्छा विकल्प नहीं हैं, क्योंकि बार-बार पूरा आगे मुड़ना इसे और परेशान कर सकता है। डेड बग, बर्ड डॉग और प्लैंक रीढ़ पर कम दबाव के साथ कोर को ट्रेन करते हैं।